चैत्र नवरात्र 2025 व हिंदू नववर्ष विक्रम सम्वत् 2082

चैत्र नवरात्र 2025 व हिंदू नववर्ष विक्रम सम्वत् 2085

हिंदू नववर्ष विक्रम सम्वत् 2081


भारतीय नववर्ष विक्रम सम्वत् 2082 तथा शालिवाहन शक संवत्‌ 1947 युगाब्द 5126 
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का शुभारम्भ रविवार 30 मार्च 2025 से प्रारम्भ हो रहा है। चैत्र माह हिंदू नववर्ष का पहला महीना होता है।

संकल्प के समय नव वर्ष नामग्रहण (नए साल का नाम रखने की प्रथा) को चैत्र अधिक मास में ही शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जा सकता है। इस संवत्सर का नाम पिंगल है तथा वर्ष 2082 है। साथ ही यह श्री शालीवाहन शकसंवत 1947 भी है और इस शक संवत का नाम क्रोधी है।

नव संवत्सर का राजा (वर्षेश)
नए वर्ष के प्रथम दिन के स्वामी को उस वर्ष का स्वामी भी मानते हैं। 2025 में हिन्दू नव वर्ष रविवार से आरंभ हो रहा है, अतः नए सम्वत् का स्वामी सूर्य है।
 
इसके साथ ही चैत्र नवरात्री प्रारम्भ हो जाता है, ब्रह्म पुराण के अनुसार, ब्रह्मा जी ने पृथ्वी की रचना चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन की थी। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन ही महाराज विक्रमादित्य ने हिन्दू नववर्ष "विक्रम संवत' का शुभारंभ किया था।

🚩 नवरात्र घट स्थापना के शुभ मुहूर्त 🚩
चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ रविवार 30 मार्च 2025 से हो रहा है और सोमवार 7 अप्रैल को नवरात्री का समापन होगा.
नवरात्रि के पावन दिनों में भक्तगण माता के 9 स्वरूपों की पूजा करते हैं. प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा का आह्वान करते हैं और स्थापना के साथ व्रत-पूजन प्रारंभ होता है. जानें पहले दिन घटस्थापना के साथ माता के किस स्वरूप की पूजा की जाती है.

ध्यान दें- घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि पर है। घटस्थापना मुहूर्त निषिद्ध वैधृति योग के दौरान है। पंचांग के अनुसार घटस्थापना के लिए अमृत मुहूर्त सबसे शुभ माना जाता है। अगर आप किन्हीं भी कारणों से अमृत मुहूर्त में घटस्थापना नहीं कर पाते हैं तो आप अभिजीत मुहूर्त में भी घटस्थापना कर सकते हैं।

घट स्थापना मुहूर्त 
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि शुरू - 29 मार्च 2025, शाम 4.27
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि समापन - 30 मार्च 2025, दोपहर 12.49
लाभ - उन्नति - 09:20 से 10:53
अमृत - सर्वोत्तम - 10:53 से 12:26
घटस्थापना मुहूर्त - 06:13 से 10:22
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त - 12:01 से 12:50

चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों का कैलेंडर
दिन (Day) तिथि (Date) वार      देवी पूजा 
पहला दिन 30 मार्च 2025 रविवार मां शैलपुत्री
दूसरा दिन 31 मार्च 2025 सोमवार मां ब्रह्मचारिणी
तीसरा दिन 01 अप्रैल 2025 मंगलवार मां चंद्रघंटा
चौथा दिन 02 अप्रैल 2025 बुधवार मां कूष्मांडा
पांचवा दिन 03 अप्रैल 2025 गुरुवार मां स्कंदमाता
छठवां दिन 04 अप्रैल 2025 शुक्रवार मां कात्यायनी
सातवां दिन 05 अप्रैल 2025 शनिवार मां कालरात्रि
आठवां दिन 06 अप्रैल 2025 रविवार मां महागौरी
नौवां दिन 07 अप्रैल 2025 सोमवार मां सिद्धिदात्री

माँ दुर्गा दुखों का नाश करने वाली देवी है, माँ दुर्गा की नौ शक्तियों को जागृत करने के लिए माँ भगवती  के 'नवार्ण मंत्र' का जाप किया जाता है.
इसलिए नवरात्रि में जब उनकी पूजा आस्था, श्रद्धा से की जाती है तो उनकी नौ शक्तियां  जागृत होकर नौ ग्रहों को नियंत्रित कर देती हैं। फलस्वरूप प्राणियों का कोई अनिष्ट नहीं हो पाता।
माँ दुर्गा का नौ अक्षरों वाला वह मंत्र है 
नवार्ण मंत्र-   ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै ।'

नौ अक्षरों वाले इस नवार्ण मंत्र के एक-एक अक्षर का संबंध दुर्गा की एक-एक शक्ति से है और उस एक-एक शक्ति का संबंध एक-एक ग्रह से है। 

नवार्ण मंत्र के नौ अक्षरों में पहला अक्षर ' ऐं ' है, जो सूर्य ग्रह को नियंत्रित करता है। ऐं का संबंध दुर्गा की पहली शक्ति शैलपुत्री से है, जिसकी उपासना 'प्रथम नवरात्रि' को की जाती है। 
दूसरा अक्षर ' ह्रीं ' है, जो चंद्रमा ग्रह को नियंत्रित करता है। इसका संबंध दुर्गा की दूसरी शक्ति ब्रह्मचारिणी से है, जिसकी पूजा दूसरे नवरात्रि को होती है। 
तीसरा अक्षर ' क्लीं ' है, जो मंगल ग्रह को नियंत्रित करता है।इसका संबंध दुर्गा की तीसरी शक्ति चंद्रघंटा से है, जिसकी पूजा तीसरे नवरात्रि को होती है। 
चौथा अक्षर 'चा' है जो बुध को नियंत्रित करता है। इनकी देवी कुष्माण्डा है जिनकी पूजा चौथे नवरात्री को होती है।
पांचवां अक्षर 'मुं' है जो गुरु ग्रह को नियंत्रित करता है। इनकी देवी स्कंदमाता है पांचवे नवरात्रि को इनकी पूजा की जाती है।
छठा अक्षर 'डा' है जो शुक्र ग्रह को नियंत्रित करता है। छठे नवरात्री को माँ कात्यायिनी की पूजा की जाती है।
सातवां अक्षर 'यै' है जो शनि ग्रह को नियंत्रित करता है। इस दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है।
आठवां अक्षर 'वि' है जो राहू को नियंत्रित करता है । नवरात्री के इस दिन माँ  महागौरी की पूजा की जाती है।
नौवा अक्षर 'च्चै '  है। जो केतु ग्रह को नियंत्रित करता है। नवरात्री के इस दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

नवरात्रि व्रत विधि :-
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्‍थापना कर अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखने का संकल्‍प करे। 
प्रतिदिन श्रद्धा भक्ति के साथ घर में अखंड ज्योत जलाये। 
सुबह-साम भोग लगाकर श्री दुर्गा सप्तशती पाठ व आरती करे। 
प्रतिदिन श्री दुर्गा सप्तसती या सिद्धि कुञ्चिका स्त्रोत्र का पाठ करे। 
अष्‍टमी या नवमी के दिन नौ कन्‍याओं को भोजन कराएं. उन्‍हें उपहार और दक्षिणा दें.
अगर संभव हो तो हवन के साथ नवमी के दिन व्रत का पारण करें.

विशेष :--आज के दिन नीम की पत्तियाँ व अजवाइन प्रसाद के तौर पर खाकर इस त्यौहार को मनाने की शुरुआत की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इससे रक्त साफ़ होता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसका स्वाद यह भी दिखाता है कि चटनी की ही तरह जीवन भी खट्टा-मीठा होता है।
-घर के छत पर भगवा झंडा लगाए ,शंखनाद करे। 
-घर में प्रतिदिन गुग्गल,लोबान व कपूर जलाएं।  

सभी देशवाशियों के लिए हिन्दू नववर्ष विक्रम सम्वत 2081 व चैत्र नवरात्री की हार्दिक बधाई ,शुभकामनायें ,सभी निरोग रहे ,सुखी रहे,संपन्न रहे यही माँ भवानी से कामना करता हूँ .

पंडित के एन पाण्डेय (कौशल)+919968550003 
 ज्योतिष,वास्तु शास्त्र व राशि रत्न विशेषज्ञ

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