चैत्र नवरात्रि 2025 हिन्दू नववर्ष नवसंवत्सर 2082 :-पंडित कौशल पाण्डेय

हिन्दू नववर्ष नवसंवत्सर 2082 :-पंडित कौशल पाण्डेय 

हिन्दू नववर्ष 2025 कब हैं? (When is Hindu New Year 2025?)
हिन्दू नववर्ष 2025 अर्थात विक्रम संवत 2082, 30 मार्च 2025 से प्रारंभ हो रहा हैं. 
हिन्दू नव वर्ष  30 मार्च 2025 को है, इसी दिन से प्रारंभ होने वाली चैत्र नवरात्रि 7 अप्रैल तक हैं, जिसे चैत्र नवरात्री के नाम से भी जाना जाता हैं.

नववर्ष नवसंवत्सर 2081


परिचय बिंदु परिचय
वर्ष 2025
विक्रम संवत 2082
हिन्दू नववर्ष 2025 कब हैं 30 मार्च  2025


हिंदू नववर्ष विक्रम सम्वत 2082 
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि शुरू 30 मार्च 2025, 

चैत्र नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त   
मुहूर्त - सुबह 06.13 - सुबह 10.22 (30 मार्च)
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त - दोपहर 12.10 - दोपहर 12.50
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है।

हिन्दू नववर्ष विक्रमी सम्वत 2082 का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा रविवार  दिनाँक 30 मार्च 2025 को चैत्र नवरात्री से प्रारम्भ हो रहा है।
इस संवत्सर का नाम सिद्धार्थी संवत है, है तथा वर्ष 2082 है, श्री शालीवाहन शकसंवत 1947 है.

*चैत्र नवरात्रि 2025 की महत्वपूर्ण तिथियां:*
दिन (Day) तिथि (Date) वार देवी पूजा (Devi Puja)
प्रतिपदा         30 मार्च 2025        रविवार मां शैलपुत्री
द्वितीया     31 मार्च 2025     सोमवार मां ब्रह्मचारिणी
तृतीया         31  मार्च 2025     सोमवार मां चंद्रघंटा (छय तिथि )
चतुर्थी         01 अप्रैल 2025      मंगलवार     मां कूष्मांडा
पंचमी         02 अप्रैल 2025     बुधवार         मां स्कंदमाता
षष्ठी             03 अप्रैल 2025     गुरुवार मां कात्यायनी
सप्तमी         04 अप्रैल 2025     शुक्रवार मां कालरात्रि
अष्टमी         05 अप्रैल 2025     शनिवार मां महागौरी 
श्री रामनवमी    06 अप्रैल 2025    रविवार मां सिद्धिदात्री

अक्सर हम लोग विदेशी सभ्यता के आदि होते जा रहे है जिससे आनेवाली पीढ़ी भारतीय संस्कारों को प्रायः भूलती जा रही है इसमें कही न कही हमारे संस्कारों की कमी है क्यों की हम लोग भारतीय संस्कारों का न पालन करते है न बच्चो को बताते है।

संवत्सर का राजा (वर्षेश) नए वर्ष के प्रथम दिन के स्वामी को उस वर्ष का स्वामी भी मानते हैं। 2025 में हिन्दू नव वर्ष रविवार से आरंभ हो रहा है, अतः नए सम्वत् का स्वामी सूर्य है। मंत्रिमंडल में इस बार राजा सूर्य और मंत्री सूर्य रहेंगे।
युवा वर्ग और महिला शक्ति के लिए यह वर्ष बहुत ही शुभ होगा।

क्या करें नव-संवत्सर के दिन —
-सभी सनातनी भगवा ध्वज के साथ नगर परिक्रमा करे और जय श्री राम का जयकारा लगाएं ।
-आज के दिन घर की छत पर ध्वजा, पताका फहराना चाहिए जिससे घर में सदा मंगल होता रहे।
- माँ भवानी का श्रद्धा विश्वास के साथ सभी परिवार के साथ मंदिर में दर्शन करने जाये और रोजाना मंदिर जाने का आज से नियम बनाये।
- आज के दिन घर में जागरण , चौकी या माँ भवानी का जाप करे घर के नार्थ ईस्ट दिशा में बैठकर और हवन करे।
- प्रकृति की रक्षा का संकल्प ले अपने धर्म जाती और गौमाता की की रक्षा करे
- आज के दिन से चिड़ियों के निमित्त सतनाजा (सात प्रकार के अनाज ) रोज चिड़ियों को खिलाये और मिटटी के बर्तन में प्यासे परिंदो को पानी पिलाये।
-आज के दिन से श्री दुर्गा सप्तशती या सिद्ध कुञ्चिका स्त्रोत्र का नौ-दिवसीय पाठ आरंभ करें।
- गऊ , ब्राह्मण, माता -पिता , गुरु का आशीर्वाद ले बड़ो का सम्मान करे
पंडित कौशल पाण्डेय के द्वारा आप सभी को नव वर्ष की शुभकामनाएँ…
यह वर्ष भारतीयों के लिये ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के लिये भी सुख, शांति एवं मंगलमय हो।

नोट-सभी हिन्दू समुदाय हिन्दू नववर्ष का आयोजन करे।अधिक से अधिक लोगों तक यह जानकारी पहुंचाए।


नव संवत्सर का राजा (वर्षेश)
नए वर्ष के प्रथम दिन के स्वामी को उस वर्ष का स्वामी भी मानते हैं। 2025 में हिन्दू नव वर्ष रविवार से आरंभ हो रहा है, अतः नए सम्वत् का स्वामी सूर्य है।

साल का राजा और मंत्री एक ही हो और सूर्य होने पर शास्त्रों में लिखा है- स्वयं राजा स्वयं मंत्री जनेषु रोगपीड़ा चौराग्नि शंका विग्रह भयं च नृपणाम।

अर्थ है- जब राजा और मंत्री दोनों एक ही हो तो राजनीतिक क्षेत्र में राजनेता अपना मनमाना आचरण शुरू करते हैं और अपनी शक्तियों का भरपूर दुरुपयोग भी करते हैं. स्वयं का स्वार्थ पूरा करने के लिए किसी भी क्रूरता की हद तक जा सकते हैं. विपक्ष के प्रति षड्यंत्र बहुत बड़े स्तर पर किए जाते हैं. जनता सरकार की तानाशाही से असन्तुष्ट रहती है. केन्द्र की सरकार और राज्य की सरकार में अत्याधिक मतभेद शुरू होते हैं.

अनाज फल सब्जियों की पैदावार में कमी आती है, सही समय पर वर्षा नहीं होती है और महंगाई में वृद्धि होती है. रेल दुर्घटना में अग्निकाण्ड, हवाई दुर्घटना होती है. नेत्र रोगों में वृद्धि होती है.

मेघेश सूर्य - संवत्सर में जब मेघेश सूर्य हो तो वर्षा में कमी रहती है, क्योंकि सूर्य अग्नितत्व प्रधान है. मेघ से संबंधित मामलों में अग्नितत्व शुभ परिणाम नहीं देता है, इसलिए उपयोगी वर्षा में कमी रहती है, गर्मी और सूखा अधिक पड़ता है.

दुर्गेश शनि- संवत्सर में जब शनि सेना का स्वामी होता है तो आंतरिक दंगे फसाद में बढ़ोतरी होती है. इस वर्ष झगड़े जिस वातावरण होने से लोगों अपने स्थानों को छोड़कर दूसरे स्थानों में जा सकते हैं. सांप्रदायिक झगड़े दंगे अधिक होंगे.

फलेश शनि- जब फलों का स्वामी शनि खाद्य सामग्री के व्यापार में अस्थिरता आती है. शनि शुष्कवृति का ग्रह होने से फसलों का उत्पादन कम रहता है, कीटाणुओं के करण फसल में संक्रमण फैलता है तथा सड़न भी अधिक होती है. इस कारण से महंगाई अधिक होती है.

शनि का राशि परिवर्तन- मार्च 2025 में शनि देव का मीन राशि में प्रवेश होगा जहां पर राहु पहले ही विराजमान हैं और कुम्भ राशि की ओर बढ़ रहे हैं. दोनों ग्रहों का जल तत्व की राशि में युति बना लेना विश्वभर के लिए चिंताजनक हो सकता है. इस युति के कारण वर्ष में नामी देश बड़े स्तर के षड्यंत्र कर के गुटबाजी फैलाकर स्वयं का स्वार्थ सिद्ध करेंगे, युद्ध जैसा वातावरण निर्मित करने का कड़ा प्रयास किया जाएगा और काफी बड़े स्तर पर सफलता भी मिलेगी. कूटनीति के सहारे से आतंकी हमलों को अंजाम दिया जाएगा, जलमार्ग से आतंकी हमलों की तथा जल से किसी प्रकार के संक्रमण की आशंका भी बनी रहेगी.

निष्कर्ष (conclusion)- शनि और सूर्य की परिस्थितियों से प्रतीत होता है कि वर्ष 2025 आम जनता के पक्ष में निराशा ही देगा. इस साल बड़े पदाधिकारियों का बोलबाला रहेगा तथा राजनीतिक क्षेत्र में तानाशाही जैसा माहौल बनेगा. आम जनता का हित नहीं सोचा जाएगा. फसलों का नुकसान बेमौसमी अल्प बरसात तथा अधिक तापमान के कारण होगा. महंगाई चरम ओर पहुंचेगी. कुल मिलाकर 2025 का वर्ष आम जनता के हित में नहीं है.


पंडित कौशल पाण्डेय 
(राष्ट्रीय अध्यक्ष)
श्री राम हर्षण शांति कुंज, भारत
श्री शिव शक्ति मंदिर, सी 8 यमुना विहार,दिल्ली

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